ग्रह दोष निवारण उपाय
ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। यदि कोई ग्रह अशुभ स्थिति में हो, नीच राशि में स्थित हो, या पाप ग्रहों से दृष्ट हो, तो वह व्यक्ति के जीवन में बाधाएँ उत्पन्न कर सकता है। वैदिक ग्रंथों में ग्रह दोष निवारण के लिए विशेष उपायों का वर्णन मिलता है। बृहद् पाराशर होरा शास्त्र में कहा गया है कि ग्रहों के कुप्रभाव को मंत्र, दान, जप, यंत्र, रत्न और पूजा के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है।
प्रत्येक ग्रह के लिए विशिष्ट बीज मंत्र और दान निर्धारित हैं, जिनका विधिपूर्वक पालन करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। इसके अतिरिक्त, उपवास, व्रत और नियमित रूप से आध्यात्मिक साधना करने से भी ग्रहों के दोष शांत होते हैं। ज्योतिषाचार्य की सलाह अनुसार किए गए ये उपाय न केवल जीवन की समस्याओं को कम करते हैं, बल्कि मानसिक शांति और आत्मबल भी प्रदान करते हैं।

ग्रहाणां प्रभावज्ञश्च, ग्रहाणां चापकारिणः।
सर्वोपायैः प्रशान्त्यर्थं, ज्योतिषी तं विचारयेत्।।
अर्थात: ग्रहों के प्रभाव को जानने वाला ज्योतिषी विभिन्न उपायों से उनके अशुभ प्रभावों को शांत कर सकता है।
ग्रह दोष निवारण के अंतर्गत निम्नलिखित प्रमुख उपाय आते हैं:
- मंत्र जाप – नवग्रह मंत्रों का उच्चारण ग्रहों को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि शनि ग्रह कष्टकारी हो, तो “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप किया जाता है।
- रत्न धारण – ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करने के लिए उपयुक्त रत्न धारण करना लाभदायक होता है, जैसे माणिक्य (सूर्य), पन्ना (बुध), पुखराज (बृहस्पति) आदि।
- यज्ञ और हवन – विशेष ग्रह शांति यज्ञ और हवन करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
- दान और सेवा – ग्रहों की कृपा पाने के लिए विशेष वस्तुओं का दान करना महत्वपूर्ण है, जैसे कि शनि के लिए काली तिल, राहु के लिए उड़द दाल, और बृहस्पति के लिए चने की दाल।
स्कंद पुराण में भी कहा गया है कि उचित उपाय करने से ग्रहों की प्रतिकूलता को समाप्त किया जा सकता है और व्यक्ति जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त कर सकता है।
“सर्वे ग्रहाः सुप्रसन्नाः, यथा जनस्य शुभं भवेत्।”
अर्थात: जब सभी ग्रह अनुकूल होते हैं, तभी व्यक्ति का जीवन शुभ और सफल होता है। इसलिए ग्रह दोषों का समय पर निवारण कर अपने जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।