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मंगल दोष पूजन

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मंगल पूजा का आध्यात्मिक महत्व

मंगल ग्रह को हिंदू ज्योतिष में शक्ति, ऊर्जा और साहस का प्रतीक माना जाता है। यह जातक के जीवन में संघर्ष, आक्रामकता और असंतुलन का कारण बन सकता है, विशेष रूप से जब यह अशुभ स्थिति में होता है। मंगल पूजा के माध्यम से इसके नकारात्मक प्रभावों को शांत किया जाता है और जीवन में सुख-शांति, समृद्धि एवं संतुलन प्राप्त होता है।

 

मंगल दोष: कारण और प्रभाव

जब मंगल जन्म कुंडली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित होता है, तो इसे मंगल दोष कहा जाता है। यह दोष जातक के जीवन में विवाह संबंधी समस्याएं, पारिवारिक कलह, आर्थिक अस्थिरता, मानसिक तनाव और शारीरिक कष्ट उत्पन्न कर सकता है। विशेष रूप से विवाह में देरी, वैवाहिक जीवन में अशांति और करियर में रुकावटों का कारण बन सकता है। इस दोष के निवारण के लिए मंगल ग्रह से संबंधित विशेष मंत्रों और पूजाओं का उल्लेख शास्त्रों में किया गया है।

मंगल दोष निवारण पूजा और वैदिक मंत्र

मंगल दोष निवारण के लिए विशेष रूप से मंगल ग्रह के बीज मंत्रों और स्तोत्रों का जाप किया जाता है। इन मंत्रों का नियमित रूप से जाप करने से जातक के जीवन में मंगल ग्रह के सकारात्मक प्रभाव बढ़ते हैं और नकारात्मक ऊर्जा का शमन होता है।

 

मंगल ग्रह बीज मंत्र:

ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः ॥

इस मंत्र के जाप से मंगल ग्रह के दोषों का निवारण होता है और जीवन में स्थिरता आती है।

उज्जैन: मंगल दोष निवारण का पवित्र स्थल

उज्जैन को मंगल दोष निवारण पूजा के लिए सर्वोत्तम स्थानों में से एक माना जाता है। यह न केवल महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का निवास स्थान है, बल्कि मंगलनाथ मंदिर भी यहां स्थित है, जिसे मंगल ग्रह का जन्मस्थान माना जाता है। मंगलनाथ मंदिर विशेष रूप से मंगल ग्रह से संबंधित दोषों को शांत करने के लिए प्रसिद्ध है। यहां मंगलवार के दिन विशेष अनुष्ठान और मंत्र जाप किए जाते हैं, जिससे जातक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

 

यहां पर किए गए पूजन और हवन से जातक के वैवाहिक जीवन, क्रोध, ऋण और दुर्घटनाओं से संबंधित समस्याओं में कमी आती है। उज्जैन की पवित्र भूमि पर की गई यह पूजा शीघ्र फलदायी मानी जाती है।

मंगल गायत्री मंत्र:

ॐ अंगारकाय विद्महे, शक्ति हस्ताय धीमहि। तन्नो भौमः प्रचोदयात्॥

इस मंत्र का जाप करने से साहस, ऊर्जा और आत्मबल में वृद्धि होती है।

 

मंगल स्तोत्र:

धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।

कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणम्यहम्॥

इस स्तोत्र के पाठ से जातक को मंगल ग्रह की कृपा प्राप्त होती है और वैवाहिक एवं पारिवारिक जीवन में सुधार होता है।