कालसर्प दोष पूजा
“नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्मांगरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय, तस्मै नकाराय नम: शिवाय॥“
(यह मंत्र शिव पुराण से लिया गया है, जो भगवान शिव की स्तुति करता है और कालसर्प दोष निवारण में सहायक माना जाता है।)
कालसर्प दोष क्या है?
कालसर्प दोष एक ज्योतिषीय योग है, जो तब उत्पन्न होता है जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित होते हैं। राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है, और जब सभी ग्रह इनके बीच आ जाते हैं, तो व्यक्ति को जीवन में कई बाधाओं, संघर्षों और समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह दोष जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है, जैसे कि करियर, विवाह, स्वास्थ्य और मानसिक शांति।

कालसर्प दोष के लक्षण
कालसर्प दोष से प्रभावित व्यक्ति को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:
- विलंबित सफलता – व्यक्ति को मेहनत के बावजूद सफलता देर से मिलती है।
- आर्थिक अस्थिरता – धन हानि, कर्ज और व्यापार में असफलता की संभावना रहती है।
- स्वास्थ्य समस्याएँ – अनिद्रा, भय, मानसिक तनाव और असाध्य रोग उत्पन्न हो सकते हैं।
- वैवाहिक जीवन में परेशानी – विवाह में देरी, वैवाहिक जीवन में कलह और संतान प्राप्ति में बाधाएँ आ सकती हैं।
- भय और असुरक्षा की भावना – व्यक्ति को अज्ञात भय सताता है और आत्मविश्वास की कमी महसूस करता है।
कालसर्प दोष के उपाय
कालसर्प दोष के प्रभावों को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
-
कालसर्प दोष पूजा
कालसर्प दोष निवारण के लिए विशेष पूजा की जाती है, जिसमें भगवान शिव, नाग देवता और राहु–केतु की विशेष आराधना की जाती है।
कालसर्प दोष निवारण मंत्र: “ॐ नागाधिपतये नमः” -
महामृत्युंजय जाप
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥”
यह मंत्र जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है। -
नाग पंचमी के दिन विशेष अनुष्ठान
नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष के प्रभाव कम होते हैं।